कुछ अनकही बातें ..............
Saturday, 6 September 2014
उलझन
क्या बतायें रास्तों में,
किस कदर उलझा हुआ हूँ,
ख्वाब तो कुछ और थे,
अब मंजिलें कुछ और हैं ...
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