मुझे मतलब नहीं इससे
की तुम्हें किससे मोहब्बत है
फकत इतना बता दो की
तुम्हारे नाम का सदका पढ़ा था
जो इक रोज आँगन में
उसे अब भी अकेले में
कहीं तुम गुनगुनाती हो...
की तुम्हें किससे मोहब्बत है
फकत इतना बता दो की
तुम्हारे नाम का सदका पढ़ा था
जो इक रोज आँगन में
उसे अब भी अकेले में
कहीं तुम गुनगुनाती हो...