Sunday, 20 September 2020

मुझसा हो जाना

मेरी भींगती रातों को तुम यूँ,
आँखों में लेकर,
सुबह कर देना । 

मेरी कंपकंपाते होठ को,
होठों में लेकर,
जिरह कर लेना । 

मेरी कौंधती सी धड़कनो पे,
सर ये रख कर,
अपना बना लेना । 

मेरी अनकही बातों को,
अपने लफ्ज़ में भर,
मुझ से ही कह देना । 

मेरी इन टूटती साँसों में,
खुद को ही भर,
अपने सा कर देना । 

मेरे कुछ आसमानी रंग को,
खुद पे लगाकर,
मुझसा हो जाना । 

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