Monday, 15 June 2015

और भी है

किताबों से बाहर जहाँ और भी है
तेरे आँखों के रस्ते खुदा और भी है

Friday, 5 June 2015

तन्हा

मुझे मेरी तन्हाई का सबब मालूम है लेकिन
किसी के संग भी हो तुम अब तलक तन्हा 
भला  इसकी वज़ह क्या है ???

Tuesday, 28 April 2015

खुदा दिख रहा है ...

इस शहर में अजीब सिलसिला चल रहा है
तुझसे मिलने के बाद
सबको खुदा दिख रहा है...

Monday, 13 April 2015

ज़िक्र

कहूँ मैं दर्द भी कैसे 
तेरा फिर ज़िक्र आएगा 
वही फिर रात आएगी
अधूरी बात आएगी |

Friday, 6 February 2015

सदका...

मुझे मतलब नहीं इससे
की तुम्हें किससे मोहब्बत है
फकत इतना बता दो की
तुम्हारे नाम का सदका पढ़ा था
जो इक रोज आँगन में
उसे अब भी अकेले में
कहीं तुम गुनगुनाती हो...

Tuesday, 27 January 2015

खुद...

हर बार खुद को बेचना चाहा था इस बाज़ार में,
पर कभी खरीददार न मिला,
तो कभी कीमत नहीं मिली |

Thursday, 1 January 2015

उलटे कदम...

उलटे क़दमों के निशाँ हैं
दूर तक जाते हुए
थोड़े रुकते डगमगाते
भींगकर जाते हुए |

हर कदम में दास्ताँ है
एक भूली सी कोई
ऐसे जैसे कोई यादें
छूटकर जाती हुई |

Creative Commons License
This work is licensed under a Creative Commons Attribution 3.0 Unported License.