उलटे क़दमों के निशाँ हैं
दूर तक जाते हुए
थोड़े रुकते डगमगाते
भींगकर जाते हुए |
हर कदम में दास्ताँ है
एक भूली सी कोई
ऐसे जैसे कोई यादें
छूटकर जाती हुई |
दूर तक जाते हुए
थोड़े रुकते डगमगाते
भींगकर जाते हुए |
हर कदम में दास्ताँ है
एक भूली सी कोई
ऐसे जैसे कोई यादें
छूटकर जाती हुई |
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