Sunday, 19 January 2020

सहर होते हुए देखा है

रातों को तेरी आँखों में सहर होते हुए देखा है 
लफ़्ज़ों को तेरे होठों पे ग़ज़ल होते हुए देखा है
उलझ तो गयी थी साँसें तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म में लेकिन 
मैंने कितने ही ख्वाहिशों को तेरी क़दमों में दफ़न होते हुए देखा है |

Saturday, 4 January 2020

तुमको भूल जाते हैं

चलो तुम आज कहते हो तो तुमको भूल जाते हैं 
तेरी चौखट पे यादों को तड़पता छोड़ आते हैं 
कोई पूछे तो कह देना की था इक काफिला गुजरा 
उसी के एक मुसाफिर का शायद अरमान है बिखरा | 


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