Friday, 21 December 2012

शिकायत........

कुछ सांसें जब होठों को सहलाते हुए गुजरे थे तो जिन्दा होने का एहसास दे गए थे | हथेलिओं  को थोड़ी  गर्मी का एहसास हुआ और दिल के किसी कोने में जमे हुए जज्बात का कोई टुकड़ा  शायद पिघल गया | 
कभी कभी हम वक़्त से कुछ ज्यादा ही मांग लेते हैं ,शायद अपनी हैसियत से बहुत अधिक ,इसीलिए तो खाली हथेलियों में कुछ उलझी लकीरें ही रह जाती हैं बस , और दिमाग में  उलझे से कुछ सवाल |  वक़्त मेरी ख्वाहिशों को अंजाम नहीं दे सका मुझे  इस बात की शिकायत तो नहीं है पर जो उसने दे दिया वो हमसे वापस ले तो लेता,वो यादों की परछाई ,वो साँसों में बसी उसकी खुशबू ,होठों पे दर्ज की गयी उसकी शिकायत , दिमाग के हर जर्रे में जज्ब किया गया उसका वो अक्स ..........| 

Monday, 17 December 2012

धुंधली तस्वीर


आइने को देखने से तस्वीरें 
बदला तो नहीं करती 
फिर भी 
मैं हर रोज 
आईने में खुद के अक्स को खोजता हूँ 
और सोचता हूँ 
शायद इस आईने में तस्वीरें  
ठीक से उभरा नहीं करती 
सो मैंने 
एक रोज 
आईने को ही बदल डाला 
और फिर से अगली सुबह 
खुद को तराशने की कोशिश की 
पर खुद को फिर से एक बार 
मैंने नावाकिफ सा ही पाया 
सो अब सोचता हूँ 
शायद यहाँ की हवाओं में ही  
कुछ नमी सी है 
इसीलिए तो 
हर रोज आईने में  
 अक्स की आँखों में 
ओस की बूंदों की तरह 
तैरता सा पानी का एक कतरा 
नज़र आ ही जाता है 
और मेरी तस्वीर 
धुंधली सी पर जाती है |

Friday, 14 December 2012

रिश्ते

गयी उस शाम की खुशबू
अभी तक छेड़ती है यूँ
मानो कोई बीता हुआ लम्हा
कहीं पर छोड़ आया हूँ |

और
अभी भी देखती हो तुम
गलत अंदाज़ नज़रों से
की मानो कोई रिश्ता
मैं ही तुमसे तोड़ आया हूँ |

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