गयी उस शाम की खुशबू
अभी तक छेड़ती है यूँ
मानो कोई बीता हुआ लम्हा
कहीं पर छोड़ आया हूँ |
और
अभी भी देखती हो तुम
गलत अंदाज़ नज़रों से
की मानो कोई रिश्ता
मैं ही तुमसे तोड़ आया हूँ |
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