Sunday, 9 November 2014

रश्क न करो यूँ...

रश्क न करो यूँ
तुझसे ही छूटकर हूँ
तुझसे ही टूटकर हूँ
बिखरा हुआ हूँ तुझसे
उलझा हुआ हूँ तुझमे

यूँ छूटने से पहले 
पहचान था तुम्हारी
खुलते हुए लबों की
आवाज़ था तुम्हारी 

रश्क न करो यूँ




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