Friday, 17 April 2020

है कोई ।

कुछ पत्थरों को शहर से उठा ले गया है कोई
शहर में फिर से हाथों में हाथ दिखने लगा है ।

शाम ढलने से पहले दिया जला गया है कोई
शायद कोई इस सूने घर में फिर से रहने लगा है ।

सफ़ेद साड़ी पे फिर से हल्दी चढ़ा गया है कोई
शायद फिर से दिल में उम्मीद जागने लगी है ।

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