तेरे अंदर आग लगी थी
दिल में तो भूचाल मचा था
कुछ तो हमको भी समझाते
अपना कुछ तो हमे सुनाते |
काश तुम्हे समझा पाते हम
उस वक़्त गले लगा पाते हम
तो फिर तुम यूँ दूर ना जाते
कुछ वक़्त जरा सा तुम रुक जाते |
कहीं घर का कोना तोड़ गए हो
कितना खाली घर छोड़ गए हो
इस खाली घर का, क्या करना है
टूटे कोने को, क्या भरना है
सुशांत सिंह राजपूत
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