Saturday, 19 January 2013

हाला


तेरा नाम लेकर ही उसे होठों से लगाया था
अब तो
उसे होठों से लगाकर ही तेरा नाम लेता हूँ |

Friday, 11 January 2013

तेरी तस्वीर



तुझे बनाने की कोशिश मैं 
हर बार करता हूँ
कभी चाँद सा मुखड़ा 
तो कभी बादलों से तेरे जुल्फ
पर हर बार कोई मासूम सी लड़की की 
तस्वीर बन जाती है 
जिसके आँखों में 
कुछ बिखरे  से ख्वाब होते हैं
और कुछ उलझे से सवाल 
पता नहीं पर क्यों 
तेरी तस्वीर मुझसे बन नहीं पाती | 


वो चाँद




बहुत दिनों से चाँद को देखा ही नहीं
पता नहीं
वो अब भी मेरे घर के पिछवाड़े में 
निकलता भी है या नहीं
पहले तो कभी कभी चांदनी रात में
चुपके से उसकी रौशनी में
खुद को खोजने की कोशिश किया करता था
पर अब तो वो भी मयस्सर नहीं होता 
अब तो वो अक्सर मेरे आँगन के पास से
बादलों में छिपकर
यूँ ही निकल जाया करता है
या शायद
उसे देखने की चाहत हो 
पर बादल ही उसे 
अपनी आगोश में छुपा लेता हो 
जो भी हो पर
बहुत दिनों से चाँद को देखा ही नहीं |

Wednesday, 9 January 2013

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नया साल और पुराने सवाल .....

आखिरी सांझ को अलविदा कहने की बहुत जल्दी है ,शायद इसीलिए की दरकते हुए गुजरे दिन को जल्द से जल्द किसी कोने में  छिपा  लेने को जी चाहता है जिसे कोई और देख न सके ......वैसे भी खुले हुए जख्म उन  हादसों की याद  ताज़ा कर देते हैं जो कहीं जेहन मैं पैबस्त हुए बैठे हैं  | खिडकियों से आती धीमी धीमी रौशनी अपनी चादर को समेट  रही है और अँधेरा अपनी आगोश मैं कई अनछुए अनकहे सवाल छुपाने की पुरजोर कोशिश में लग गया है |
कुछ सवाल शायद इस गुजरते साल के साथ ख़त्म नहीं होंगे ,उन्हें अपने जवाब ढूँढने नए साल में आना होगा |
ये अलग बात है कि इन सवालों को पैदा होने में कई साँसों को अपना वजूद खोना पड़ा , कई लफ्ज़ खामोश हो गए |

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