बहुत किरदार
दुनिया में, निभाऊँ कौन सा साहब,
कहो तो बावफ़ा बन
जाऊँ, या फिर बेवफा साहब |
अरे इन सर्द
साँसों को, यहाँ बस थाम है रखा,
जरा सा पूछ कर
कोई, मुझे तो इत्तला कर दो,
इसे मैं जज्ब ही
रखूँ, या फिर छोड़ दूँ साहब |
बहुत से दर्द हैं दिल में, छिपाऊँ कौन सा साहब,
कभी लब बोल देते हैं, कभी आंखें मेरी साहब|
बहुत से दर्द हैं दिल में, छिपाऊँ कौन सा साहब,
कभी लब बोल देते हैं, कभी आंखें मेरी साहब|
कहो तो मैं तेरे
खातिर, कोई किरदार नौ जी लूँ,
मगर इस वास्ते भी
तुम, कभी बोला करो साहब |
बहुत किरदार
दुनिया में, निभाऊँ कौन सा साहब....
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