चलो तुम आज कहते हो तो तुमको भूल जाते हैं
तेरी चौखट पे यादों को तड़पता छोड़ आते हैं
कोई पूछे तो कह देना की था इक काफिला गुजरा
उसी के एक मुसाफिर का शायद अरमान है बिखरा |
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ReplyDeleteबात ऐसी भी भला क्या रखी है तुझमें
ReplyDeleteकि एक दीवाने ने जमीं सर पे उठा रखी है
इत्ताफ़ाक़न् कहीं मिल जाएँ तो कहना उससे
तेरे शायर ने बड़ी धूम् मचा रखी है!
By: Ismail Raaz