Friday, 22 May 2020

पता नहीं क्यों



आपके साँसों में किसी और की आहट भी न हो, इस तरह आपके साँसों में बिखर जाना चाहता हूँ | आपके धडकनों के दरम्यान किसी को थोड़ी भी जगह न मिल जाए इस तरह इन धड़कनों में पैबस्त हो जाना कहता हूँ | आपके पलकों के करवटों के बीच किसी का ख़याल न आ जाए, इस तरह आपके इन प्यारी आँखों को अपने ख़यालों से भर देना चाहता हूँ | लेकिन क्या करूँ अब ये कम्बख्त सांसें भी मेरी बात कहाँ मानती हैं, धड़कनें भी मेरा साथ छोड़ने को बेताब हुई जा रही हैं और ख़याल की जगह तो किसी के दूर जाने के एहसास ने ले ली है | 

रास्ते वहां आ पहुंचे जहाँ से आगे जाना भी चाहता हूँ लेकिन पता नहीं क्यों दिल बैठा जा रहा है | मंजिलें पता है बस वहां जाने में डर लग रहा है |         

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