मेरी भींगती रातों को तुम यूँ,
आँखों में लेकर,
सुबह कर देना ।
मेरी कंपकंपाते होठ को,
होठों में लेकर,
जिरह कर लेना ।
मेरी कौंधती सी धड़कनो पे,
सर ये रख कर,
अपना बना लेना ।
मेरी अनकही बातों को,
अपने लफ्ज़ में भर,
मुझ से ही कह देना ।
मेरी इन टूटती साँसों में,
खुद को ही भर,
अपने सा कर देना ।
मेरे कुछ आसमानी रंग को,
खुद पे लगाकर,
मुझसा हो जाना ।