Sunday, 20 September 2020

मुझसा हो जाना

मेरी भींगती रातों को तुम यूँ,
आँखों में लेकर,
सुबह कर देना । 

मेरी कंपकंपाते होठ को,
होठों में लेकर,
जिरह कर लेना । 

मेरी कौंधती सी धड़कनो पे,
सर ये रख कर,
अपना बना लेना । 

मेरी अनकही बातों को,
अपने लफ्ज़ में भर,
मुझ से ही कह देना । 

मेरी इन टूटती साँसों में,
खुद को ही भर,
अपने सा कर देना । 

मेरे कुछ आसमानी रंग को,
खुद पे लगाकर,
मुझसा हो जाना । 

Friday, 19 June 2020

तेरे अंदर


तेरे  अंदर आग लगी थी 
दिल में तो भूचाल मचा था
कुछ तो हमको भी समझाते 
अपना कुछ तो हमे सुनाते | 

काश तुम्हे समझा पाते हम 
उस वक़्त गले लगा पाते हम
तो फिर तुम यूँ दूर ना जाते 
कुछ वक़्त जरा सा तुम रुक जाते | 

कहीं घर का कोना तोड़ गए हो
कितना खाली घर छोड़ गए हो 
इस खाली घर का, क्या करना है 
टूटे कोने को, क्या भरना है 
इतना तो बतला कर जाते
कुछ तो तुम समझा कर जाते  | 


सुशांत सिंह राजपूत

Friday, 12 June 2020

जरा तुम

कभी बादल जो न बरसे
जरा तुम रूठ फिर जाना
मैं कितना भी मनाऊं तो
मगर तुम मान मत जाना ,
बहुत सारे जो हैं शिकवे
इसे तुम भूल मत जाना ,
एक शिकवा एक दिन का हो
और दिन भर मैं मनाऊंगा,
और सिलसला ये उम्र भर का हो
बस कभी कभी मान भी जाना |

कभी मैं न भी बुलाऊँ तो
यूँ ही तुम मिलने आ जाना,
भले कितने भी हो शिकवे
उसे तुम भूल कर आना,
कभी गर रूठ जाऊं तो
जरा तुम भी मना लेना,
बस मेरे गोदी में सर रख के
जरा सी  देर सो लेना,
भले हो दूरियां कितनी
भाई कह के मिटा देना |
 

ज़िंदगी की भाग-दौड़ में जब भी मुझे खुद पर से भरोसा उठा, हर उस वक़्त में मुझ पर  भरोसा करने के लिए हर जन्म में तुम मेरे घर को अपना बनाने आज के ही दिन आ जाना |  हाँ ! आ जाना, लेकिन मेरे बाद |  तुम मेरे ज़िंदगी का सबसे अनमोल तोहफा हो जो आज के दिन ऊपर वाले ने मुझे दिया था | जन्मदिन मुबारक हो मेरी प्यारी सी गुड़िया | मेरी हर ख़ुशी तुम्हे मिल जाए | 

बहुत सी मंजिलें हैं जो, तुम्हे अभी और पानी है

बहुत पामाल रस्तों से, यहाँ तक काफिला पहुंचा
बहुत सी ख्वाहिशों का, यहाँ अरमान है निकला
बहुत सी मंजिलें हैं जो, तुम्हे अभी और पानी है
बड़ी सी ज़िंदगी है जो, तुम्हे अभी और जीनी है
बहुत से भाग्य थे जागे, तुम्हारे एक होने से
बहुत से ख्वाब हैं जागे, तुम्हारे एक आने से।

Monday, 1 June 2020

फिर से


धीमे धीमे ये रात कटी है
मेरी आँख तुम्हारी चौखट पे थी
और ध्यान तुम्हारी आहट पे थी
कुछ याद तुम्हारे बिस्तर पे थी
कोई बात हमारे जेहन में थी
किन-किन बातों को समझाते हम
हर बातों पर बात रुकी थी
कुछ बातों में रंज था तेरा
कुछ बातों में दर्द रुका था
पर हर बातें इस पर रुक जाती
की पेड़ों पर कोपल फूटे थे
बारिश में तन मन भींगे थे
पर कल की तेज हवाओं में
कुछ कोपल भी टूट गए हैं
एक नया नीड़ भी था उस पर
वो भी डाली से छूट गया है 
ये कुछ और नहीं बस वक़्त बुरा है
फिर से पंछी आयेंगे ही
फिर से कोपल भी फूटेगा
फिर से नव नीर बनायेंगे
और तेज हवा छू आयेंगे। 

Friday, 22 May 2020

पता नहीं क्यों



आपके साँसों में किसी और की आहट भी न हो, इस तरह आपके साँसों में बिखर जाना चाहता हूँ | आपके धडकनों के दरम्यान किसी को थोड़ी भी जगह न मिल जाए इस तरह इन धड़कनों में पैबस्त हो जाना कहता हूँ | आपके पलकों के करवटों के बीच किसी का ख़याल न आ जाए, इस तरह आपके इन प्यारी आँखों को अपने ख़यालों से भर देना चाहता हूँ | लेकिन क्या करूँ अब ये कम्बख्त सांसें भी मेरी बात कहाँ मानती हैं, धड़कनें भी मेरा साथ छोड़ने को बेताब हुई जा रही हैं और ख़याल की जगह तो किसी के दूर जाने के एहसास ने ले ली है | 

रास्ते वहां आ पहुंचे जहाँ से आगे जाना भी चाहता हूँ लेकिन पता नहीं क्यों दिल बैठा जा रहा है | मंजिलें पता है बस वहां जाने में डर लग रहा है |         

Tuesday, 19 May 2020

यही बस चाहता हूँ मैं

यही बस चाहता हूँ मैं
कि मैं तुझमे बिखर जाऊं
कोई न छू सके मुझको
कोई न छीन ले तुझसे
बस तेरे आंसूं में मैं निकलूं
तेरे आहों में बस जाऊं 

यही बस चाहता हूँ मैं
की मैं अब रात बन जाऊं
कोई न देख ले मुझको
कोई न पूछ ले मुझसे
बस तेरे दामन का हूँ मैं दाग
मैं अपने खूं से ही धुल जाऊं  

Sunday, 26 April 2020

बस,

हम मान चुके सब कुछ तुमको,
हम हार चुके सब कुछ तुमको ।
बस,
कुछ रस्मों की दीवारें हैं,
कुछ वक़्त से भी हम हारे हैं ।

Friday, 17 April 2020

है कोई ।

कुछ पत्थरों को शहर से उठा ले गया है कोई
शहर में फिर से हाथों में हाथ दिखने लगा है ।

शाम ढलने से पहले दिया जला गया है कोई
शायद कोई इस सूने घर में फिर से रहने लगा है ।

सफ़ेद साड़ी पे फिर से हल्दी चढ़ा गया है कोई
शायद फिर से दिल में उम्मीद जागने लगी है ।

की कहीं तुम

ये वक़्त गर,
थम जाए तो, देखूँ तुझे,
खो जाए तो, सोचूँ तुझे,
मिल जाए तो, पूछूँ कभी,
की कहीं तुम मेरे सीने से बिछड़ी हुई कोई साँस तो नहीं...


ये नींद गर,
खुल जाए तो, तेरा बनूँ,
आ जाए तो, ख्वाबें बुनू,
उड़ जाए तो, सोचूँ कभी, 
की कहीं तुम बस कोई एक खूबसूरत ख्वाब तो नहीं...

Monday, 2 March 2020

चाहता हूँ

आज फिर मैं ख्वाब देखने  की खुद से इज़ाज़त चाहता हूँ,
 इन रुके जज्बात को फिर से अल्फ़ाज़ देना चाहता हूँ ।
 मेरे आँखों में शाम रुकी है तो रूकी ही सही,
 लेकिन एक बार फिर से किसी आँखों में सहर होकर बिखर जाना चाहता हूँ । 
मेरे हाथ की लकीरें अधूरी हैं तो अधूरी ही सही,
लेकिन किसी के हाथ की लकीरों को इनसे मिलाकर उसे मुकम्मल बनाना चाहता हूँ ।
मेरे आँखों के ख्वाब रूठे हैं तो रूठे ही सही,
लेकिन किसी के खूबसूरत आँखों का ख्वाब बनकर जी लेना चाहता हूँ ।
डर है  किसी की रुसवाइयों का तो रूसवाइयाँ ही सही,
लेकिन एक बार फिर  से किसी की सांस बन कर उसी के सीने मे बिखर जाना चाहता हूँ।

Thursday, 20 February 2020

गुज़र गया

वो वक़्त था जो गुज़र गया,
कुछ था रगों में जो निकल गया,
मुझे कोई फर्क नहीं अब इन हवाओं से,
क्योंकि जो सांस था वो अब संभल गया ।

Wednesday, 19 February 2020

कभी जो याद आऊं तो

कभी जो याद आऊं तो 
जरा तुम आँख भर लेना 
कभी साँसों में आऊं तो 
जरा तुम आह भर लेना 
कभी धड़कन में आऊं तो 
उसे अलफ़ाज़ दे देना 
कभी ख़्वाबों में आऊं तो
उसे सच्चा समझ लेना ।

Thursday, 13 February 2020

बदलाव

कहीं कुछ अंदर से टूटा तुझमे भी है और मुझ में भी है
कुछ अँधेरी रात तेरे दामन में भी है और मेरे दामन में भी है ।
शायद कुछ नया बनाने के लिए पहले पुराने को तोडना भी जरूरी होता है
कुछ नए अरमानों के सजने से पहले पुराने का बिखरना भी जरूरी होता है ।
कुछ पुराने वादों को फिर से करना भी जरूरी होता है
कुछ रूठे ख़्वाबों को फिर से मनाना भी जरूरी होता है ।


बस तुम हथेलियों को थामे रहना, 
मैं उसकी लकीरें बदल दूंगा ।
बस तुम चेहरे को थामे रहना,
मैं आँखों में नए ख्वाब भर दूंगा ।
बस तुम हवाओं को थामे रहना,
मैं तेरी उलझी जुल्फों को सुलझा दूंगा ।
बस तुम मेरे हाथ को थामे रखना
मैं तुम्हारी साँसों में अपनी साँस भर दूंगा ।

Sunday, 19 January 2020

सहर होते हुए देखा है

रातों को तेरी आँखों में सहर होते हुए देखा है 
लफ़्ज़ों को तेरे होठों पे ग़ज़ल होते हुए देखा है
उलझ तो गयी थी साँसें तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म में लेकिन 
मैंने कितने ही ख्वाहिशों को तेरी क़दमों में दफ़न होते हुए देखा है |

Saturday, 4 January 2020

तुमको भूल जाते हैं

चलो तुम आज कहते हो तो तुमको भूल जाते हैं 
तेरी चौखट पे यादों को तड़पता छोड़ आते हैं 
कोई पूछे तो कह देना की था इक काफिला गुजरा 
उसी के एक मुसाफिर का शायद अरमान है बिखरा | 


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